काट रहे हो तुम वृक्षों को, कुछ भी नहीं विचार किया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। इतना बड़ा हमारा जग है, क्षरण यहाँ स्वीकार नहीं। वे भी जीव इसी जग के हैं, जीना क्या अधिकार नहीं? फल अरु फूल दिया है इसने, राही को भी छांव दिया। वृक्षों ने जो कुछ भी पाया, उसे हमीं पे वार दिया।। - कुलदीप पांडेfrom Latest News देश News18 हिंदी http://bit.ly/2Woynqh
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