एक समय था जब चुनाव में डाकुओं के फरमान जारी होते थे जो नहीं माना उसने डाकुओं की गोली खाई. किसी जमाने मे चंबल और उसके आसपास के इलाको में चुनावों के दौरान प्रत्याशियों की किस्मत खूंखार डाकुओं की गोलियों और दबदबे से तय होती थी, लेकिन चंबल के बीहड़ों पर सालों तक राज करने वाले डाकू या तो चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं या फिर अपने पसंद के नेताओं के लिए माहौल बनाने का काम कर रहे हैं. देखिए ये वीडियो.from Latest News देश News18 हिंदी http://bit.ly/2v4qHcM
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